इलिया। क्षेत्र के ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्व वाले घुरहूपुर स्थित बौद्ध स्थल पर शनिवार को श्रीलंका के नेतृत्व में वियतनाम के बौद्ध भिक्षुओं का एक दल पहुंचा। इस दौरान बौद्ध अनुयायियों ने भगवान बुद्ध की प्रतिमा के समक्ष श्रद्धापूर्वक दीप प्रज्ज्वलित कर नमन किया तथा बुद्ध के शांति व अहिंसा के संदेशों का स्मरण किया।
वियतनाम के प्रसिद्ध बौद्ध भिक्षु वेन थिक मीन क्वांग के नेतृत्व में पहुंचे 13 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने घुरहूपुर की पहाड़ी पर स्थित भगवान बुद्ध के भित्ति चित्रों, प्राचीन गुफाओं और अन्य बौद्ध अवशेषों का बारीकी से अवलोकन किया। स्थल की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्ता की सराहना करते हुए बौद्ध भिक्षुओं ने कहा कि भगवान बुद्ध से जुड़े इस पवित्र स्थल पर पहुंचकर उन्हें अत्यंत शांति और आत्मिक सुख की अनुभूति हुई है। उन्होंने कहा कि भारत भगवान बुद्ध की तपोभूमि और ज्ञानभूमि है तथा यहां के बौद्ध स्थलों का दर्शन उनके लिए एक अविस्मरणीय अनुभव है।
दल के सदस्यों ने घुरहूपुर पहाड़ी की प्राकृतिक सुंदरता और वहां संरक्षित बौद्ध धरोहरों की भी मुक्तकंठ से प्रशंसा की। उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसे ऐतिहासिक स्थलों के उचित संरक्षण और विकास से विश्वभर के बौद्ध अनुयायियों को भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से सीधे जुड़ने का अवसर मिलेगा।
इस अवसर पर बौद्ध संस्थान के अध्यक्ष वशिष्ठ मौर्य ने विदेशी अतिथियों का पारंपरिक स्वागत किया। उन्होंने कहा कि घुरहूपुर का यह बौद्ध स्थल ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है और यहां देश-विदेश से लगातार श्रद्धालुओं का आगमन होता रहता है। इस दौरान गोविन्द मौर्य, ओम प्रकाश, रमाशंकर राजभर, महेन्द्र राजभर, चिथरु राजभर सहित कई अन्य लोग प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।