सकलडीहा। विकास खंड क्षेत्र में संचालित पशु आश्रय केंद्रों के ठप होने के कारण सुबह से शाम तक सड़कों पर भटक रहे निराश्रित पशु आए दिन तेज रफ्तार और भारी वाहनों की चपेट में आ रहे हैं। प्रशासनिक अनदेखी के चलते बीते महज एक सप्ताह के भीतर हाईवे पर पांच मवेशियों की दर्दनाक मौत हो चुकी है, जिससे स्थानीय कस्बावासियों में भारी आक्रोश व्याप्त है।

​सरकारी दावों के विपरीत धरातल पर बिगड़े हालात
​प्रदेश सरकार भले ही निराश्रित पशुओं के संरक्षण को लेकर कटिबद्धता जता रही है और केयरटेकर, चारा-पानी, तिरपाल तथा काऊ कोट जैसी व्यवस्थाओं पर लाखों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन सकलडीहा में धरातल पर स्थितियां इसके विपरीत हैं। कई महीनों से बेसहारा पशुओं को आश्रय केंद्र का सहारा नहीं मिल पा रहा है, जिससे वे मुख्य मार्गों पर घूमते रहते हैं और गंभीर हादसों का कारण बन रहे हैं।

​बंद पड़े हैं लाखों की लागत से बने केंद्र
​कस्बावासियों का आरोप है कि सकलडीहा ब्लॉक और तहसील मुख्यालय होने के बावजूद न तो काऊ कैचर की व्यवस्था है और न ही पशु आश्रय केंद्र चालू हैं। पूर्व में तारापुर और सदलपुरा सहित अन्य स्थानों पर लाखों रुपये की लागत से बनाए गए केंद्र फिलहाल धूल फांक रहे हैं और बंद पड़े हैं। स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन से तत्काल इन बेसहारा पशुओं को आश्रय केंद्रों में भिजवाने की पुरजोर मांग की है।
​मामले पर खंड विकास अधिकारी विजय कुमार सिंह ने बताया कि सूचना मिलने पर पशुओं को आश्रय केंद्रों में भिजवाने की कार्रवाई की जाती है। बीते दिनों जिन मवेशियों की दुर्घटना में मौत हुई थी, उन्हें ग्राम सभा के कर्मचारियों को भेजकर उठवा दिया गया था।