नेगुरा गांव की चौहान बस्ती में सफाई कर्मियों की अनदेखी पर ग्रामीणों ने खुद फरसा, कुदाल और झाड़ू उठाकर पूजा स्थल से घास व गंदगी साफ की और मिसाल पेश की।
चंदौली। लोकआस्था और माताओं के अपने बच्चों की दीर्घायु के लिए रखे जाने वाले पावन 'जितिया (जीवितपुत्रिका) पर्व' के अवसर पर ग्राम
सभा नेगुरा की चौहान बस्ती में सफाई व्यवस्था को लेकर ग्रामीणों में भारी रोष देखने को मिला। त्यौहार के दृष्टिगत पूजा स्थल और उसके आसपास फैली गंदगी की सुध जब जिम्मेदार सफाई कर्मियों ने नहीं ली, तो ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। हालांकि, नाराजगी के बीच ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन का मुंह ताकने के बजाय खुद ही सफाई का बीड़ा उठाया और श्रमदान कर पूरे पूजा स्थल को चकाचक कर दिया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार सदर विकासखंड के ग्राम सभा नेगुरा स्थित चौहान बस्ती में जितिया पर्व की पूजा के लिए पारंपरिक स्थल तय है। त्यौहार के मद्देनजर ग्रामीणों को उम्मीद थी कि ग्राम पंचायत के सफाई कर्मी समय रहते यहाँ की साफ-सफाई कर देंगे। लेकिन पर्व का दिन करीब आने के बावजूद जब पूजा स्थल पर घास-फूस और गंदगी का अंबार लगा रहा और कोई सफाई कर्मी नहीं पहुंचा, तो ग्रामीणों में गहरा असंतोष फैल गया।
हाथ में फरसा, कुदाल और झाड़ू लेकर ग्रामीणों ने की घास की सफाई
सफाई कर्मियों की इस घोर लापरवाही से निराश होने के बजाय बस्ती के युवाओं, बुजुर्गों ने एकजुट होकर खुद कमान संभाली। ग्रामीणों ने हाथों में फरसा, कुदाल और झाड़ू थाम लिया और पूजा स्थल पर उगी बड़ी-बड़ी घास व खरपतवार को छीलकर साफ किया। इसके बाद पूरे परिसर में झाड़ू लगाकर कचरा हटाया गया। कुछ ही घंटों की कड़ी मेहनत के बाद ग्रामीणों ने पूरे स्थल को स्वच्छ, सुरक्षित और धार्मिक अनुष्ठान के अनुकूल बना दिया।
ग्रामीणों का कहना है कि त्यौहारों पर सार्वजनिक व पूजा स्थलों की सफाई की प्राथमिक जिम्मेदारी पंचायत के सफाई कर्मियों की होती है। इसके बावजूद उनकी यह उदासीनता प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है। ग्रामीणों ने मांग की है कि ऐसे गैर-जिम्मेदार कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में किसी भी धार्मिक या सामाजिक पर्व पर इस तरह की स्थिति उत्पन्न न हो।
ग्रामीणों के इस सामूहिक प्रयास और जज्बे की पूरे क्षेत्र में जमकर सराहना हो रही है, वहीं दूसरी ओर ग्राम पंचायत की सफाई व्यवस्था की पोल खुल गई है।