मुगलसराय में फर्जी कस्टमर केयर ऐप के जरिए जापानी नागरिकों से हर माह 10-12 करोड़ की साइबर ठगी करने वाले अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट का पर्दाफाश हुआ है। चाइनीज खातों और हवाला के जरिए पैसों का लेन-देन किया जाता था।
चंदौली। मुगलसराय के कैलाशपुरी इलाके में चल रहे एक बड़े साइबर फ्रॉड नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए पुलिस और साइबर टीम ने चौकाने वाले खुलासे किए हैं। यह गिरोह फर्जी कस्टमर केयर ऐप के जरिए जापान के नागरिकों को अपना शिकार बनाता था और हर महीने हवाला के जरिए 10 से 12 करोड़ रुपये की हेराफेरी कर रहा था। पुलिस की जांच में इस साइबर ठगी का मास्टरमाइंड मुगलसराय निवासी विनीत उर्फ मोनू पांडेय सामने आया है, जबकि बिहार निवासी रौनक सिंह इस सिंडिकेट के संचालन की कमान संभाल रहा था।
पुलिस के अनुसार, कैलाशपुरी स्थित एक इमारत से पिछले छह महीने से यह अंतरराष्ट्रीय साइबर नेटवर्क संचालित हो रहा था। ठगों ने एक विशेष ऐप तैयार किया था, जो जापान के लोगों को तकनीकी समस्या के दौरान आधिकारिक कस्टमर केयर जैसा प्रतीत होता था। जब जापानी नागरिक कंप्यूटर या लैपटॉप से जुड़ी दिक्कतों के समाधान के लिए ऐप के माध्यम से संपर्क करते थे, तो आरोपी झांसे में लेकर ओटीपी (OTP) जनरेट करवा लेते थे। इसके बाद उनके बैंक खातों का एक्सेस हासिल कर पूरी रकम चाइनीज बैंक खातों में ट्रांसफर कर दी जाती थी। वहां से हवाला कारोबार के जरिए पैसा मास्टरमाइंड विनीत पांडेय तक पहुंचता था।
पकड़े गए आरोपी जापानी भाषा बोलने में पूरी तरह पारंगत हैं। गिरोह का मैनेजर रौनक सिंह युवकों की भर्ती से लेकर वेतन भुगतान तक का सारा काम देखता था, जिसके खाते में पुलिस को 9 लाख रुपये मिले हैं।
मामले में पुलिस पकड़े गए आरोपियों से गहन पूछताछ कर रही है और गिरोह से जुड़े अन्य बैंक खातों व नेटवर्क को खंगालने में जुटी है। वहीं फरार चल रहे मुख्य मास्टरमाइंड विनीत उर्फ मोनू पांडेय की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है।