ताहिरपुर-मिल्कीपुर में बुद्ध बिहार व लोना माता समाधिस्थल को फ्रंट विलेज कॉरिडोर अधिग्रहण से बचाने के लिए 366वें दिन भी धरना जारी रहा। भिक्षुओं और ग्रामीणों ने विशाल पैदल शांति यात्रा निकाल सरकार से परियोजना रद्द करने की मांग की।
चंदौली। जिले के ताहिरपुर-मिल्कीपुर क्षेत्र स्थित ऐतिहासिक तथागत बुद्ध बिहार और लोना माता समाधिस्थल के अस्तित्व को बचाने की मांग को लेकर 'बौद्ध बिहार बचाओ संघर्ष मोर्चा' के बैनर तले जारी सत्याग्रह 366वें दिन में प्रवेश कर गया है। 28 सितंबर 2025 से शुरू हुए इस अनिश्चितकालीन धरने के एक वर्ष से अधिक बीत जाने के बाद भी शासन-प्रशासन द्वारा कोई ठोस पहल न किए जाने से स्थानीय ग्रामीणों और आंदोलनकारियों में गहरा आक्रोश है।
प्रस्तावित 'फ्रंट विलेज कॉरिडोर' परियोजना के तहत भूमि अधिग्रहण के विरोध में आंदोलनकारियों ने अपनी आवाज और बुलंद कर दी है। धम्मा लर्निंग सेंटर, सारनाथ के विहारपति चंद्रमा थेरू भंते के नेतृत्व में हजारों बौद्ध भिक्षुओं और क्षेत्रीय ग्रामीणों ने रामनगर टेंगरा मोड़ चौराहे से तथागत बुद्ध बिहार तक एक विशाल पैदल शांति यात्रा निकाली। इस दौरान पूरा क्षेत्र "फ्रंट विलेज कॉरिडोर वापस लो" और "जान दे देंगे, जमीन नहीं देंगे" के गगनभेदी नारों से गूंज उठा।
आंदोलनकारियों का स्पष्ट कहना है कि यह लड़ाई केवल जमीन की नहीं, बल्कि क्षेत्र की आस्था, संस्कृति और ऐतिहासिक विरासत को बचाने की है। संघ के पदाधिकारियों एवं चंद्रमा थेरू भंते ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने कॉरिडोर परियोजना को निरस्त करने तथा बुद्ध बिहार व ग्रामीणों की भूमि की सुरक्षा का लिखित आश्वासन नहीं दिया, तो इस आंदोलन को राष्ट्रव्यापी स्तर पर और तीव्र किया जाएगा।